Tata Sons और RBI का नया नियम

क्या अब Tata को शेयर बाजार में आना ही होगा ?

सोचिए, अगर आपसे कोई कहे कि "अब आपको अपना हिसाब-किताब सबके सामने रखना होगा" तो आप क्या करेंगे? यही मुश्किल इस वक्त Tata Sons के सामने है। RBI ने एक नया नियम लाने का प्रस्ताव रखा है और इससे देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Tata Sons की नींद उड़ सकती है।
पहले समझते हैं NBFC क्या होता है?
NBFC यानी Non-Banking Financial Company। सीधे शब्दों में कहें तो ऐसी कंपनी जो बैंक तो नहीं है, लेकिन पैसों का लेन-देन, निवेश और कर्ज जैसे काम करती है। RBI इन कंपनियों को उनके आकार के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में रखता है। सबसे बड़ी और ताकतवर कंपनियां "Upper Layer" में आती हैं। इन पर सबसे ज्यादा नियम और निगरानी होती है।
अब RBI क्या बदलना चाहता है?
अभी तक NBFC को Upper Layer में डालने का तरीका बहुत पेचीदा था। एक जटिल स्कोरिंग सिस्टम था जिसमें कंपनी का आकार, कर्ज, दूसरी कंपनियों से जुड़ाव सब कुछ देखा जाता था। RBI ने अब कहा है इतनी जटिलता क्यों? एक सीधा नियम बनाते हैं। नया प्रस्ताव यह है कि जिस भी NBFC की कुल संपत्ति (assets) 1 लाख करोड़ रुपये या उससे ज्यादा हो, वह सीधे Upper Layer में आएगी। बस। कोई पेचीदा हिसाब नहीं। यह नियम हर पांच साल में दोबारा देखा जाएगा।
Tata Sons पर क्या असर पड़ेगा?
यहीं से असली कहानी शुरू होती है। Tata Sons की अकेली संपत्ति करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये है। यानी यह नए नियम के दायरे में साफ आती है। Upper Layer में आने का मतलब है कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होना होगा। यानी Tata Sons को अपने शेयर आम लोगों के लिए बाजार में उतारने होंगे। अब Tata Sons यह बिल्कुल नहीं चाहती।
Tata Sons ने बचने की कोशिश क्या की?
Tata Sons ने पिछले साल एक चतुर कदम उठाया। उसने अपने ऊपर से 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुका दिया। घाटे की जगह नकदी आ गई। इससे कंपनी की NBFC-UL की श्रेणी से बाहर निकलने की उम्मीद थी। साथ ही कंपनी ने RBI से अपना CIC (Core Investment Company) लाइसेंस भी वापस करने की अर्जी दी। CIC लाइसेंस छोड़ने से भी लिस्टिंग की जरूरत खत्म हो सकती थी। लेकिन RBI ने अभी तक इस अर्जी पर कोई फैसला नहीं सुनाया है।
सरकारी NBFCs पर भी नया नियम लागू होगा
अभी तक NABARD, SIDBI, Exim Bank जैसी सरकारी संस्थाएं इस Upper Layer से बाहर रखी जाती थीं। चाहे वे कितनी भी बड़ी हों। RBI अब यह भेदभाव खत्म करना चाहता है। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकारी हो या निजी अगर संपत्ति 1 लाख करोड़ से ज्यादा है तो नियम सबके लिए एक जैसे होंगे। यह एक बड़ा बदलाव है। इससे कई बड़ी सरकारी संस्थाएं भी सख्त निगरानी के दायरे में आ जाएंगी।
Tata परिवार के अंदर भी मतभेद
Tata Sons में एक दिलचस्प अंदरूनी खींचतान भी चल रही है। Tata Trusts जिनके पास Tata Sons में 66% हिस्सेदारी है कंपनी को private रखना चाहते हैं। Noel Tata, जो Tata Trusts के चेयरमैन हैं, चाहते हैं कि कंपनी बाजार में न आए। लेकिन Shapoorji Pallonji Group जिनके पास करीब 18% हिस्सेदारी है लिस्टिंग के पक्ष में हैं। वे चाहते हैं कि कंपनी बाजार में आए ताकि उनकी हिस्सेदारी की सही कीमत मिल सके। यह मामला सिर्फ RBI और Tata का नहीं रहा यह Tata परिवार के भीतर भी एक बड़ा सवाल बन गया है।
अभी क्या हुआ है और आगे क्या होगा?
RBI ने इस नए नियम पर 4 मई 2026 तक आम लोगों और कंपनियों से राय मांगी है। उसके बाद अंतिम नियम जारी होगा। ICRA के विशेषज्ञ AM Karthik का कहना है कि इस नए तरीके से पहले की 15 कंपनियों से ज्यादा NBFCs Upper Layer में आ सकती हैं। Tata Sons के लिए यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। अगर RBI उनकी CIC लाइसेंस वापसी की अर्जी मान लेता है तो शायद बच निकलें। अगर नहीं मानी तो लिस्टिंग लगभग तय है।
निष्कर्ष
RBI का यह नया प्रस्ताव बहुत सीधा और साफ है 1 लाख करोड़ से बड़े हो तो सख्त नियम मानो। Tata Sons इस दायरे में आती है। अब गेंद RBI के पाले में है। वह CIC लाइसेंस पर क्या फैसला करता है उसी से तय होगा कि Tata Sons को शेयर बाजार में आना होगा या नहीं। यह मामला आने वाले महीनों में और दिलचस्प होने वाला है।